नींद के पञ्चम चरण का, दृश्य वर्णन है प्रिये यह, शीश मेरा चूम कर तुम, गीत कोई गा रही हो... मैं तुम्हारे क्रोड में हो, शून्य बालक-सा पड़ा हूँ, नीर नयन…
पूरी रचना पढ़ेंयदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों तो क्या तुम दूसरे क…
पूरी रचना पढ़ेंमेरा शहर एक लम्बी बहस की तरह है सड़कें - बेतुकी दलीलों-सी… और गलियाँ इस तरह जैसे एक बात को कोई इधर घसीटता कोई उधर हर मकान एक मुट्ठी-सा भिंचा हुआ दीवा…
पूरी रचना पढ़ेंकिसी रोज़ तुम कहो - 'मुझे तुमसे प्रेम है', 'पर मुझे जाना पड़ेगा' इन दोनों बातों पर बराबर विश्वास करूँ और, कह सकूँ - अलविदा मैं ख़ुद में …
पूरी रचना पढ़ेंसबा तुम सुन रही हो ना, तुम्हीं से कह रहा हूँ मैं, सबा ये लोग झूठे हैं, इन्होंने कुछ नहीं देखा, के इनपे आज तक पुर कोई मंजर खुल नहीं पाया, ये आपने आप स…
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